4/07/2010

सद्गुरु स्तुति

जय जय सतगुरु आरती तेरी, निर्मल दृष्टि करी जिन मेरी !!

तारतम ज्ञान हाथ कर दीन्हों, क्षीर नीर को निर्णय कीन्हों !!

पिंड ब्रह्माण्ड लखाये दोई, पूरण ब्रह्म बिन और नहीं कोई !!

मोह तत्त्व उपज्यो है सोई, जो उपज्यो सो तो रह्यो न कोई !!

बैठे सिंहासन जुगल विहारी, जुगल विहारी पीया नवल विहारी !!

छबी निरखत सतगुरु बली हारी, छबी निरखत महामति बली हारी !!

श्री ५ नवतनपुरी धाम जामनगर
श्री अर्जुन राज
प्रणाम