तीर्थोंकी महिमाका गान समस्त वेद-पुराण, उपनिषद् और शास्त्रोंमें हुआ है, तीर्थोंमें भी श्री ५ नवतनपुरीधामका महत्त्व विशेषरूपसे है, इस धामकी असीम महत्ताको लघु लेखनी द्वारा आंकना सूर्यको दीपक दिखाने जैसा ही प्रयास है, "तितीर्षु दुस्तरं मोहादुडुपेनास्मि सागरम" वाली महाकवि कालिदासजीकी उक्तिको ही सार्थक बनाने जैसा उपक्रम है, सूर्य सारे विश्वको प्रकाश देता है, यह सर्विदित है, जिस प्रकार उत्तर भारतमें प्रवाहित होनेवाली नदियोंके उद्गम स्थलके रूपमें मानसरोवरकी प्रसिद्ध है, उसी प्रकार श्री कृष्ण प्रणामी धर्मका प्रादुर्भाव स्थल साक्षात श्यामा महारानीके अवतार और श्री राजजीके आवेश स्वरूप निजानन्द स्वामी सद्गुरु श्री देवचन्द्रजी महाराज द्वारा स्थापित आद्यधर्मपीठ श्री ५ नवतनपुरीधाम श्री कृष्ण प्रणामीयोंका एकमात्र केन्द्र स्थान है, यह उक्ति प्रणामी जगतमें प्रसिद्ध है । एसे परम पुनीत श्री ५ नवतनपुरी धाम को हम सदर प्रणाम करते हैं । प्रणाम ................