भूमिका
श्री खुलासा ग्रन्थ श्री कृष्ण प्रणामी धर्म-निजानन्द सम्प्रदायके परम पावन महाग्रन्थ महामति श्री प्राणनाथजीकी दिव्य वाणी श्री तारतम सागरका सप्तम ग्रन्थ (कुलजम स्वरूप का सातवाँ ग्रन्थ-स्कंध है. कुलजम-दरिया जैसे सभी नदीयाँ (दरिया) में आकर समाहित होती है. एसेही कुलजम स्वरूप में वेद, पुराण, उपनिषद् एसेही कुरान-पुराण का समीकरण) है. इसमें कुल १८ प्रकरण एवं १०२० चौपाइयाँ हैं ! इसकी भाषा हिन्दी है साथमें अरबी एवं फारसीके शब्द भी यथास्थान प्रयुक्त हैं. इसका अवतरण काल वि.सं. १७३८ से १७४३ पर्यन्त माना गया है
महामति श्री प्राणनाथजी धर्म प्रचार यात्रामें रामनगर पहुँचे थे. उस समय औरंगजेब द्वारा भेजे गए पुरदल खान एवं शेख खिदर स्वामीजी से मिलाने आए ! महामतिने उनको कुरान एवं पुराणके विभिन्न प्रसंगोंकी साम्यताकी बात समझायी और कहा, सभी धर्मग्रन्थ एक ही परमतत्त्वकी बात करते हैं, मात्र भाषा और शैलीमें अन्तर है ! खुदा, अल्लाह या ब्रह्म ये सभी शब्द एक ही परमात्माके लिए प्रयुक्त हैं ! कतेब ग्रंथोंमें परमतत्त्वके लिए जो बात कही है वैसी ही बात वैदिक ग्रंथोंमें कही गयी है ! वास्तवमें हिन्दू या मुसलमान सभी एक ही परमात्माकी सन्तानें हैं किन्तु धर्मके मर्मको समझे बिना परस्पर लड़ाई करते हैं-
जो कछु कह्य कतेबने, सोई कह्या वेद !
दोउ वन्दे एक साहेबके, पर लदत बिना पाए भेव !!
बासरी मालकी और हकी, लिखी महंमद तीन सूरत !
होसी हक दीदार सबन को, करसी महंमद सिफायत !!
कुरान आदि कतेब ग्रंथोंमें वैकुण्ठको मलकूत, अक्षरब्रह्मको नूर जलाल तथा अक्षरातीतको नूर जमाल कहा है ! इसी प्रकार ब्रह्मसृष्टिके लिए मोमिन, कुमारिकाओंके लिए फिरस्ते, अक्षरधामके लिए सदरतुलमुंतहा, परमधामके लिए अरस अजीम, श्यामाजीके लिए रूह अल्लाह, श्री कृष्णजीके लिए मुहम्मद, बुद्धाजीके लिए इस्राफिल, विजयाभिनन्दके लिए इमाम, ब्रह्मा-विष्णु एवं महेशके लिए क्रमश: मेकाइल, अजाजील एवं अजराइल आदि शब्दोंका प्रयोग हुआ है. श्रीमद्भागवतमें वर्णित वसुदेवकी कथा नूह पैगम्बरकी कथासे मिलाती है. गोवर्धन लीला कोहतूर तूफ़ान तथा योगमायाकी लीला किस्ती और बागके प्रसंगसे सामी हैं ! इस प्रकार नाम और भाषामें ही अन्तर है किन्तु भाव सबका एक है !
महामती श्री प्राणनाथजीने इस ग्रंथके द्वारा सर्वधर्म समभावकी आधारशीला रखी है ! वस्तुत: सभी धर्मावलम्बी एक दूसरेके मत एवं धर्मग्रन्थोंको आदर देने लगेंगे एवं एक दूसरेसे अच्छाइयाँ ग्रहण करने लगेंगे तो धर्मके नाम पर फैला रही वैमनष्यता दूर होगी. मानव मानवमें प्यार होगा और धर्मके नाम पर हो रहे अत्याचार रुक जाएँगे. वर्तमान समयमें महामतिके विचार एवं कार्य अत्याधिक सान्दर्भिक सिद्ध होते हैं !!
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श्री ५ नवतनपुरी धाम खिजडा मन्दिर जामनगर
श्री अर्जुन राज
प्रणाम